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बालको मेडिकल सेंटर ने मध्य भारत में कैंसर उपचार को बनाया अधिक सुलभ

कोरबा। कैंसर का पता चलना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। लेकिन मध्य भारत के कई मरीजों के लिए असली चुनौती उपचार केंद्र तक पहुँचना भी है। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से मरीजों को कई सौ किलोमीटर दूर बड़े अस्पतालों तक जाना पड़ता है। रहने की व्यवस्था, काम से छुट्टी और बार-बार परामर्श, जाँच, कीमोथेरेपी, सर्जरी और फॉलो-अप के लिए यात्रा, ये सब परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ा सकते हैं।

इसी चुनौती को कम करने के उद्देश्य से वर्ष 2018 में नया रायपुर में बालको मेडिकल सेंटर (बीएमसी) की स्थापना हुई। आज आठ वर्षों बाद बीएमसी मध्य भारत में विशेषज्ञ कैंसर उपचार की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने वाले प्रमुख केंद्रों में शामिल है। अब तक यहाँ 75,000 से अधिक मरीजों का उपचार, लगभग 5 लाख ओपीडी परामर्श, 96,000 से अधिक कीमोथेरेपी सत्र और 13,500 से अधिक सर्जरी की जा चुकी हैं।

कोंडागांव के 28 वर्षीय एक मरीज की कहानी इस बदलाव को समझने में मदद करती है। नया रायपुर से करीब 250 किलोमीटर दूर रहने वाले इस मरीज को दुर्लभ और गंभीर रक्त कैंसर का पता चला। बीएमसी में कई चरणों की कीमोथेरेपी के बाद उनका ऑटोलॉगस स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया गया। उपचार के लिए उन्हें अलग-अलग संस्थानों के बीच भटकना नहीं पड़ा और उनका पूरा उपचार एक ही केंद्र में हुआ।

इसी तरह, 48 वर्षीय एक मरीज को पैंक्रियाज के ऐसे कैंसर का पता चला, जिसकी सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी। विशेषज्ञ चिकित्सकों के समन्वय से बीएमसी में उनका उपचार किया गया। दो वर्ष बाद जब वे फॉलो-अप के लिए लौटे, तो वे स्वस्थ थे और सामान्य जीवन में वापस आ चुके थे।

ये अनुभव बताते हैं कि कैंसर उपचार में विशेषज्ञता जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण है उसका मरीज तक पहुँचना और उपचार का पूरा होना। बीएमसी का प्रयास इसी दिशा में है, उपचार के विभिन्न चरणों को एक ही व्यवस्था के अंतर्गत उपलब्ध कराना। यहाँ मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट के साथ हेमेटोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक, फिजियोथेरेपिस्ट, पोषण विशेषज्ञ और पैलिएटिव केयर टीम मिलकर काम करती हैं। मल्टीडिसिप्लिनरी ट्यूमर बोर्ड के माध्यम से विशेषज्ञ मरीज की स्थिति की संयुक्त समीक्षा कर उपचार की योजना तैयार करते हैं।

बीएमसी ने मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, उन्नत जाँच और हेमेटोलॉजी जैसी विशेषज्ञ सेवाओं का भी विस्तार किया है। यहाँ 180 से अधिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं और इसका ट्रांसप्लांट कार्यक्रम मध्य भारत के बड़े कार्यक्रमों में शामिल है।

उपचार के साथ मरीजों और उनके परिजनों की अन्य जरूरतों का भी ध्यान रखा जाता है। सुख सराय में उपचार के दौरान रियायती आवास की सुविधा मिलती है। दूरदराज के मरीजों के लिए परिवहन सहायता उपलब्ध है, जबकि कीमोथेरेपी से गुजर रहे मरीजों को उच्च प्रोटीन युक्त आहार दिया जाता है। पात्र मरीजों को उपचार और जाँच के लिए बीएमसी चैरिटेबल फंड से आर्थिक सहायता भी दी जाती है, जिसमें सरकारी योजनाओं के दायरे से बाहर रहने वाले मरीज भी शामिल हैं।

प्रारंभिक पहचान के महत्व पर वरिष्ठ मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. यशवंत कश्यप कहते हैं, “कैंसर के उपचार में इसकी शुरुआती पहचान बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि बीमारी किस अवस्था में सामने आती है, इसका सीधा असर उपचार के विकल्पों और परिणामों पर पड़ सकता है। इसलिए नियमित जाँच और जागरूकता के माध्यम से कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में करना आवश्यक है। इसी दिशा में केंद्र ने छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के ग्रामीण एवं शहरी समुदायों में 500 से अधिक कैंसर जाँच और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इसमें स्तन कैंसर, बच्चेदानी के मुख का कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर व ओरल (मुख) के कैंसर पर विशेष ध्यान दिया गया है।”

आज बीएमसी तक छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा, मध्य प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश से भी मरीज पहुँच रहे हैं। इससे नया रायपुर की भूमिका क्षेत्रीय कैंसर उपचार केंद्र के रूप में मजबूत हो रही है। बालको मेडिकल सेंटर में सभी सरकारी योजनाओं जैसे आयुष्मान भारत, मुख्य मंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अलावा सभी इंश्योरेंस कंपनी द्वारा भी कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध है। विशेषज्ञ उपचार, ट्रांसप्लांट, बहु-विषयक चिकित्सा, आर्थिक सहायता, आवास, परिवहन और शुरुआती जाँच, इन सभी को एक साथ लाकर बीएमसी कैंसर उपचार की राह में आने वाली कई दूरियों को कम करने का प्रयास कर रहा है। उद्देश्य यही है कि मरीज की उपचार यात्रा में दूरी उसकी उम्मीद और उपचार के बीच बाधा न बने।

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Birju bala

MINAKSHI TIMES की संपादकीय टीम।

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